गंगा अवतरण की कथा

ब्रहमा से अत्रि , अत्रि से चन्द्रमा ,चन्द्रमा से बुद्ध, बुद्ध से पुरखा , पुरखा में आयु ,आयु में नहुस ,नहुस से यति ,ययाति , संयाति आयति वियाति और कृति नामक ६ महाबली पुत्र पैदा हुए ।
अत्रि से उत्पन्न चन्द्रवंशियो में पुरखा ऐल के बाद सबसे चर्चित कहानी ययाति और उसके पुत्रो की है । ययति के ५ पुत्र थे पुरु , यदु , नर्वस अनु एवं द्रुहु । इन ५ पुत्रो ने सारी एशिया पर राज किया था ऋग्वेद में इसका उल्लेख मिलता है ।
ययाति बहुत भोग विलासी राजा था जब भी यमराज उसे लेने जाते तो कह देता की अभी बहुत काम बचा है । अभी तो कुछ देखा ही नई है ।
महाभारत युद्ध से पहले एक और युद्ध हुआ था जिसे दशराज युद्ध के नाम से जाना जाता है , इस युद्ध की चर्चा ऋगवेद में मिलती है ।
ब्रम्हा से भृगु , भृगु से वारनि भृगु , वारनि से बघरस्य , शुनक शुक्राचार्य बाघुल सनंग और च्यवन का जन्म हुआ । सुनक से सोनक , शुक्राचार्य से त्वष्टा का जन्म हुआ । त्वष्टा से विश्वरूप और विश्वकर्मा , विश्वकर्मा से मनु , मम , त्वष्टा शिल्पी और दैवेज्ञ का जन्म हुआ । देश राज युद्ध के समय भर्गु मौजूद थे । इसवांकु वंश के राजा सगर भागीरथ श्री राम के पूर्वज थे । राजा सगर की दो रानिया थी केसिनी और सुमति । जब बहुत समय तक दोनों रानियों के कोई संतान नहीं हुई तो राजा दोनों रानियों के साथ हिमालय पर जाकर तपस्या करने लगे ।

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